Tuesday, March 19, 2019

凌友诗:因“声情并茂”发言而出名的台籍港区政协委员

今年中国的“两会”上,台湾出生,代表香港的全国政协委员凌友诗因夸张的语调进行“朗诵式发言”引发网络热议,“爆红”的她也引起了台湾当局的注意。

台湾内政部表示,凌友诗担任中国政协委员,违反《台湾地区与大陆地区人民关系条例》,且其统战言论极其不当,决议对其罚款新台币50万元。台湾陆委会也表示,如果确认凌友诗入籍中国大陆或持有中国大陆护照,将注销其台湾户籍。

争议言论
3月11日,中国政协十三届二次会议第四次全体会议上,政协委员凌友诗发言时朗诵般夸张表情,高昂音调,引起网民讨论,她发言的视频也在社交媒体上广泛流传。

凌友诗发言时称:“世界上只有一个中国,全中国的唯一合法代表政府是中华人民共和国政府。我以能作为一个堂堂正正的中国人参与国家的政治体制而自豪!”

“中华人民共和国政府是中国的唯一合法政府,是中国政权的正统。这个地位,在两岸统一的进程中最为重要。未来两岸和平协商,中国唯一合法政府要守住‘一个国家、一部宪法、一个中央政府、一支军队’这个大原则;一旦‘台独’发生,要担起吊民伐罪的责任。”她说。

凌友诗自称是在台湾出生、眷村长大、十七岁移居到香港的“台籍港区委员”。她在香港拿到博士学位,随后进入香港特区政府工作。凌友诗还说,其父亲曾担任国民党海军副舰长,经历1958年的金门炮战。

根据此前媒体报道,凌友诗1962年出生于台湾高雄,父亲是广东番禺人,16岁全家迁到香港,随后凌友诗考上香港中文大学,先后完成本科和硕士学习。2003年,凌友诗在香港大学取得政治哲学博士学位,2005年进入香港特区政府担任中央政策组高级研究主任。目前,凌友诗是香港中文大学当代中国文化研究中心荣誉研究员。

凌友诗此前的媒体访问也被网民翻出来讨论。她去年3月接受中评社采访时曾表示:“中国达到了实质的民主。而不是像西方一样只能投一票,投完票后就变奴隶了。”

凌友诗“声情并茂”的发言在网上引发吐槽。台湾作家李敖之子、剑桥大学亚洲与中东系博士生李戡在微博上发文批凌友诗恶心,“拜托找样板也找个像样点的”。

北京大学法学院教授贺卫方则作了一首打油诗调侃:“花枝慢摇站讲台,媚语嗲声似招怀。满口不伦不类理,五十七岁一女孩。”

不过,也有中国大陆网民对她表示欣赏:“好!欢迎回到祖国的社会主义大家庭,真正的在大家庭里当家做主。”

台湾反应
据台湾媒体报道,台湾陆委会发言人上周四(3月14日)表示,凌友诗持有中华民国户籍,近年也确实持中华民国护照入境台湾。有关机构正在调查她是否已经入籍大陆或持有大陆护照,如果掌握证据,将注销她的台湾户籍。

随后台湾内政部也作出回应。内政部称,凌友诗担任中国政协委员违反《台湾地区与大陆地区人民关系条例》中的担任中共党政军职务的规定,而且凌友诗发表的言论极其不当,决定处以50万新台币罚款。

台湾陆委会和内政部回应之后,凌友诗接受中国内地官方媒体《环球时报》表示,台湾要对她罚款和撤销户籍,是对台湾人“杀鸡儆猴”,是台湾当局借着她警告其他人,“别像凌友诗一样跑到大陆去当政协委员”。

凌友诗也回应了网民对她诟病较多的语气和措辞的问题。“说这么严肃的话题是不容含糊的,它不是一个普通的陈述,所以我觉得必须要用洪亮、坚定的语气,”她说。

台湾陆委会周一晚间回覆BBC中文记者查询时表示,台湾政府依法行政,台湾人到大陆发展,只要不违反法令,政府均正面看待。而凌友诗担任中国大陆政协委员,违反有关规定。

陆委会称,政治协商会议是中共领导的统战组织,与中华民国宪政体制及台湾自由民主体制并不相容,“中共当局积极拢络在台湾出生,赴陆发展的台籍人士参加政协活动,目的在塑造宣传样板,此等人士的列席或发言,不会获得台湾人民的认同,也不能代表台湾的主流民意”。

两会“表演”
两岸关系观察者和政治学者对凌友诗的表现有各种解读。

李戡认为,中国当局安排这种“样板式”的台湾代表在不同场合亮相,都是在释放对台政治信号。

他对BBC中文表示,2017年中共十九大安排台湾籍代表卢丽安出场,以表明台湾人可申请加入共产党,甚至参加党代表大会,“这次两会安排‘台籍港区’的政协委员凌友诗发言,释放的信号更加具体,因为她同时‘代表’香港和台湾,意味着统一后的台湾问题,将比照香港模式办理”。

Wednesday, March 6, 2019

कनाडा में 30 लाख रु. खर्च करके 3 महीने में कृत्रिम बर्फ से बनाई गई सबसे बड़ी भूलभुलैया

मैनिटोबा. कनाडा में बर्फ से दुनिया की सबसे बड़ी भूल-भुलैया बनाई गई। इसे बनाने वाले क्लींट मास का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। मास ने दिसंबर में इस पर काम करना शुरू किया था। खास बात ये है कि उन्होंने यह स्ट्रक्चर स्नो मशीन और स्नो ब्लोअर की मदद से बनाई गई कृत्रिम बर्फ से तैयार किया।

भूलभुलैया की दीवार 6.5 फीट ऊंची और दो फीट चौड़ी रखी गई। इसे पार करने में 30 मिनट का समय लगता है। बीते सप्ताह इसे देखने के लिए हर दिन करीब 1000 लोग पहुंचे थे।

क्लींट को पत्नी ने दी प्रेरणा
क्लींट ने कहा, ‘‘मैंने यह पाया कि मैं उस समय थोड़ा जुनूनी था। मैंने अपनी पत्नी से पूछा, क्या मैं बर्फ से कुछ हैरान करने वाली चीज बना सकता हूं? ऐसा कुछ करने के लिए आपको ऐसे ही एक जुनूनी पार्टनर की तलाश होती है, जो आपको इस काम के लिए हां कह सके।’’

उन्होंने बताया, ‘‘मेरे स्टाफ के कर्मचारी ने मुझे बर्फ की एक भूलभुलैया यह कहते हुए बताई थी कि यह कितनी बड़ी है। जब आप बर्फ के साथ कुछ बनाते हैं तो यह कठिन होता है क्योंकि यह स्टील नहीं है।’’

क्लींट ने कहा, ‘‘कृत्रिम रूप से तैयार किया बर्फ, प्राकृतिक बर्फ से ज्यादा स्थायी होता है। अगर आप इस भूलभुलैया को देखेंगे तो पाएंगे कि इनसे टकराकर दीवार से पहले आपकी कार टूट सकती है। इसे तैयार करने में 57 हजार कैनेडियन डॉलर (करीब 30 लाख रुपए) खर्च हुए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम यह मानकर चल रहे थे कि यह बहुत बड़ी बनने वाली थी, लेकिन हमें जरूरत थी डाटा और ऐसे लोगों की जो इस काम को स्वीकार कर सकें।’’

क्लींट ने बताया, ‘‘गिनिज की ओर से मुझे सुबह ही ईमेल मिला मैंने तुरंत ऑनलाइन चैक किया और रिकॉर्ड देखा। यह मेरे परिवार और मैनिटोबा के लिए उत्साहित पल था।’’

"कर्जमाफी के नाम पर कर्नाटक सरकार ने वोट मांगे थे। उन्होंने कहा था कि किसानों का कर्ज माफ करेंगे। लेकिन उन्होंने जनता को मूर्ख बनाया। किसानों पर उल्टे केस कर दिए। पुलिसवालों को भेजा। यही उनका तरीका है। ऐसे खिलाड़ियों का हिसाब बराबर करने का मौका आ गया है। यह किसानों तक लाभ पहुंचाने में अड़ंगे डाल रहे हैं। वे यह इसलिए नहीं कर रहे क्योंकि इसमें बिचौलियों का लाभ नहीं है।"
परिवार की राजनीति करने वालों को नई नीति पसंद नहीं आ रही- मोदी

मोदी ने कहा, ''केंद्र सरकार अगर दिल्ली से एक रुपया भेजती है तो 100 पैसे पूरे गरीब के खाते में जाते हैं। कोई बिचौलिया लोगों का हक नहीं मार सकता था। पहले की सरकार ने जो योजना बनाई थी उसके मुताबिक करीब 8 करोड़ लोग ऐसे थे जो कागजों पर ही थे। पैदा नहीं होते थे। वे स्कूल में स्कॉलरशिप लेने लगते थे, वे दिव्यांग हो जाते थे, वे सरकार योजनाओं का फायदा लेने लगते थे, पेंशन लेने लगते थे।''

''सिर्फ अपने परिवार की राजनीति करने वाले नेताओं को भारत की नई नीति पसंद नहीं आ रही। अपने स्वार्थों की सिद्धि हो सके इसलिए वे देश की मजबूत सरकार से डरते हैं। आज कर्नाटक में मजबूर सरकार बनी है तो आप देख रहे हैं क्या हो रहा है। कोई कहता है कि कर्नाटक की जनता को लूटो।''

''कर्नाटक का बुरा हुआ तो क्या देश का बुरा होना चाहिए? इसलिए मैं आपसे कहने आया हूं कि छोटी सी गलती कर्नाटक का बड़ा नुकसान कर सकती है। कभी कभी छोटी गलती महंगी पड़ जाती है। इसलिए भाईयों बहनों पूर्णता वाली सरकार किस मजबूती से आगे बढ़ रही है वो आप देख सकते हैं। पूर्ण नहीं होती तो कर्नाटक सरकार की तरह चलती। वे इकट्ठे हो रहे हैं मोदी को हटाने के लिए और मोदी मेहनत कर रहा है आतंकवाद को

इसके बाद प्रधानमंत्री तमिलनाडु के कांचीपुरम जाएंगे। यहां सड़क, रेलवे और ऊर्जा क्षेत्र की कई विकास परियोजनाओं को उद्घघाटन करेंगे। मोदी वीडियो लिंक के जरिए चेन्नई के डॉ. एमजीआर ऑफ आर्ट्स कॉलेज में एमजी रामचंद्रन की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। एमजीआर 1977 से 1987 के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे थे।

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