Friday, January 25, 2019

राहुल ने कहा- मैं मोदी से नफरत नहीं करता, लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनने दूंगा

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को ओडिशा पहुंचे। उन्होंने कहा, "मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुझसे असहमत हैं और मैं उनसे असहमत हूं। मैं उनसे लड़ूंगा, कोशिश करूंगा और उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनने दूंगा। लेकिन मैं उनसे नफरत नहीं करता। मैं उन्हें अपनी राय रखने का अधिकार देता हूं।''

मोदी सोचते हैं कि वे सबकुछ जानते हैं- राहुल
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''मेरे राजनेता बनने में एक बात अच्छी हुई, मुझे गालियां दी गईं। भाजपा और आरएसएस की तरफ से ये सबसे अच्छा तोहफा था, जो वे दे सकते थे। मैं मोदी को देखता हूं, जब वे मुझे गालियां देते हैं, मुझे लगता है कि उन्हें गले लगा लूं।''

राहुल ने कहा, "हम लोगों को सुनते हैं, यह सामान्य प्रक्रिया है। मोदी की तरह नहीं, जिन्हें लगता है कि वे सब कुछ जानते हैं। यहां फीडबैक आने की कोई संभावना नहीं रहती। यही भाजपा और हम (कांग्रेस) में बेसिक अंतर है।''

राहुल ने भुवनेश्वर में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रियंका की राजनीति में एंट्री को लेकर उन्होंने कहा- उनके राजनीति में आने को लेकर कई सालों से चर्चा चल रही थी। लेकिन तब उनके बच्चे छोटे थे। प्रियंका अपने बच्चों का ख्याल रखना चाहती थीं, अब वे बड़े हो गए हैं।

भाजपा और बीजद एक जैसी
राहुल ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘बीजद और भाजपा के मॉडल एक जैसे हैं। मोदी और पटनायक में संबंध हैं। भ्रष्टाचार मामलों की वजह से पटनायक मोदी के दबाव में हैं। वे मोदी का मौन रहकर समर्थन करते हैं। पटनायक निरंकुश हैं लेकिन उनमें मोदी की तरह नफरत नहीं है।''

'नए रोजगार पैदा न होना समस्या'
उन्होंने कहा, "भारत में रोजगार का संकट है। समस्या है कि यहां रोजगार के नए अवसर नहीं मिल रहे। चीन सभी को पछाड़ रहा है। चीन में ऑटोमेशन रोजगार पैदा करने के लिए समस्या क्यों नहीं बनी? जब मैं मानसरोवर गया, मुझे वहां कई मंत्री मिले, उन्होंने बताया कि नए रोजगार पैदा करने में कोई समस्या नहीं। असल मुद्दा ये है कि अगर आप उत्पादन कर रहे हैं और तकनीकी से जुड़े हैं, तो कोई समस्या नहीं।''

हम हेल्दी हैं, तो भारत हेल्दी है'
सचिन ने कहा, ‘‘हम यही मैसेज देना चाहते हैं कि भारत एक स्पोर्ट्स लविंग नेशन है, लेकिन क्या ये एक स्पोर्ट्स प्लेइंग नेशन है? इस जगह एक बहुत बड़ा क्वेश्चन मार्क लग जाता है। अगर दिल पर हाथ रखकर कहेंगे कि है या नहीं, तो मैं कहूंगा कि शायद हम देखना पसंद करते हैं, खेलना नहीं। दैनिक भास्कर के जरिए हमारा मैसेज यही है कि आप खेलना शुरू करें। सभी को कॉम्पीटीटिव स्पोर्ट्स खेलने की जरूरत नहीं है। सभी को मेडल लाने की जरूरत नहीं है। अपनी सेहत का ख्याल रखें। अगर हम हेल्दी हैं तो भारत हेल्दी है।’’ 

'लड़के और लड़कियों को बराबर मौके मिलें'
सचिन ने दूसरा मैसेज दिया, ‘‘लड़के और लड़कियों में भेदभाव न करें। दोनों को बराबर मौके दें, बराबर सहयोग करें और प्रोत्साहित करें। हमारी महिला खिलाड़ी सिंधु और साक्षी रियो ओलिंपिक्स में मेडल लेकर आईं। अगर उनके पैरेंट्स ने उन्हें बराबर मौके नहीं दिए होते तो शायद हमें जश्न मनाने का अवसर नहीं मिलता। मैं सभी पैरेंट्स से कहना चाहूंगा कि बेटे-बेटी में फर्क न करें, दोनों को बराबर मौके दें और उन्हें सपोर्ट करें।’’

स्पेशल एडिशन में होंगे रोचक किस्से, अनूठे आइडिया
सचिन स्पेशल एडिशन के लिए भास्कर ने कॉन्टेस्ट कराया था। इसमें आई 3000 से ज्यादा एंट्रियों में से सचिन ने कुछ आर्टिकल शॉर्ट लिस्ट किए हैं। सचिन द्वारा चुनी गई एंट्रियों को प्रकाशित किया जाएगा। इनमें खेलों को लेकर देश में किए जा रहे काम, ग्राउंड रिपोर्ट, रोचक किस्से और अनूठे आइडियाज पर आधारित आर्टिकल भी होंगे।

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